दशहरा
कब: अश्विन/ आसोज मास

सितम्बर/ अक्टूबर
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी। इस पर्व को भगवती विजया के नाम पर विजयादशमी भी कहते हैं। बंगाल में यह उत्सव दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। यह क्षत्रियों का बहुत बड़ा पर्व है। दशहरे की पूजा स्त्री-पुरुष सभी करते हैं।
इस दिन संध्या के समय नीलकण्ठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। इस दिन सूखे आटे से भूमि में दशहरे का चित्र माण्ड कर उसकी पूजा करते हैं। इस दिन रावण, कुम्भकरण व मेघनाथ के पुतलों में पटाखे भर कर उनका दहन करते हैं। आजकल बाजार में दशहरे के प्रिंटेड चित्र भी उपलब्ध हैं।
क्या: पूजा की तैयारी

दशहरे की एक विशेष छवि फर्श पर गेहूं के आटे या चूने से खींची जाती है। लोग दशहरे की छपी हुई तस्वीर की भी पूजा करते हैं।
गोबर या मिट्टी की नौ टिकड़ी एवं २ ढक्कनदार कटोरियाँ बनायें। कटोरी में पैसा रखें आटा चित्र मांडने के लिए, या दशहरे का प्रिंटेड चित्र जल, रोली, मोली, चावल, गुड़, फूल, केला, मूली, ग्वारफली, धूप-दीप, माचिस, दक्षिणा झुवारा जो नवरात्रे में उगाते हैं इस दिन दिवाली के लिए नये बही-खाते बनाने देते हैं। ब्राह्मणों को जिमाने के लिए भोजन की व्यवस्था
कैसे: पूजा की विधि
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