भादी अमावस - राणी सती दादी की पूजा
कब: भाद्रपद/भादो मास - अगस्त/ सितम्बर

'भादव' मास की अमावस्या को 'सतियों की अमावस्या' होती है। इस पूजा का पितरों के संदर्भ में बहुत महत्व है। इस दिन राणी सती दादीजी के मंदिर में जाकर विधिवत पूजा की जाती है व पितरों को धोक दी जाती है।
क्या: पूजा की तैयारी
रोली, मोली, मेहंदी, चावल, नाल जोड़ी काजल, चूड़ी, सिंदूर, नारियल, गट प्रसाद, दीपक, कलश, चढ़ाने के लिए रुपया मीठा पूड़ा, घूघरे डिजाईन का पूड़ा पूड़े की किनारी में बलदार डिजाईन बनाते हैं I
कैसे: पूजा की विधि
एक साफ पाटे पर रोली से सथिया बनाते हैं। तेरह रोली, तेरह चावल, तेरह मेहंदी व तेरह काजल की टीकी देते है।
तेरह जगह नारियल के छोटे टुकड़े चढ़ाते हैं, तेरह मीठे पूड़े और २ घूघरे वाले पूड़े चढ़ाते हैं। नाल जोड़ी, प्रसाद और रुपया चढ़ाते हैं। दीपक चासते हैं, धूप खेते हैं। धोक देकर अपने को टीका लगाते हैं। आरती गाते हैं।
आरती राणी सती दादी का
जय श्री राणी सती मईया, जय श्री राणी सती ।
अपने भक्त जनों की दूर करो विपत्ति ॥
जय अवनि अनन्तर ज्योति अखंडित मंडित चुहँकुम्मा।
दुर्जन दलन खडग की विद्युत सम प्रतिभा ।
जय मरकत मणि मन्दिर अति मंजुल शोभा लखि न परे ।
ललित ध्वजा चहुं और कंचन कलश धरे ।।
जय घटा धनन पड़ावल बाजे शंख मृदंग घुरे।
किनर गायन करते वेद ध्वनि उच्चरे ।।
जय सप्त मातका करे आरती सुरगण ध्यान धरे।
विविध प्रकार के व्यंजन फल भेंट करे ।।
जय संकट विकट विदारिणी, नाशनि हो कुमति ।
सेवक जन हृदि पटले मृदुल करन सुमति ।।
जय अमल कमल दल लोचनि मोचनि त्रय तापा।
शांति सुखी मैया तेरी शरण गही माता ।।
जय या मैया जी की आरती जो कोई नर गावें।
सदन सिद्धि नवनिधि फल मन वांछित पावें ।।
जय राणी सतीजी के मंदिर जाकर जल, रोली, मेहंदी, काजल, मोली, चावल, फूल, पूड़ा, प्रसाद, नाल, चूड़ी, सिंदूर, नारियल से पूजा करते हैं और दक्षिणा चढ़ाते हैंI
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